jaipur food - Gajab Jaipur https://jaipur.gajabmedia.com Fri, 12 Aug 2022 04:49:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://i0.wp.com/jaipur.gajabmedia.com/wp-content/uploads/2022/06/cropped-Gajab-Jaipur-1.png?fit=32%2C32&ssl=1 jaipur food - Gajab Jaipur https://jaipur.gajabmedia.com 32 32 208110529 जयपुर: ये मावा नान नहीं खाया तो क्या खाया, ₹300 की एक नान-करोड़ों का करोबार, ये है जयपुर का 5 स्टार ढाबा https://jaipur.gajabmedia.com/816/jaipur-sharma-dhaba-famous-naan-food/ https://jaipur.gajabmedia.com/816/jaipur-sharma-dhaba-famous-naan-food/#respond Sun, 31 Jul 2022 06:10:40 +0000 https://jaipur.gajabmedia.com/?p=816 कई बार ऐसा होता है कि हम लगातार घर का खाना खाते-खाते बोर हो जाते हैं ऐसे में हम कहीं ना कहीं बाहर की ओर …

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कई बार ऐसा होता है कि हम लगातार घर का खाना खाते-खाते बोर हो जाते हैं ऐसे में हम कहीं ना कहीं बाहर की ओर रुख करते हैं. कई फेमस रेस्टोरेंट के अलावा अधिकतर लोग ढाबे पर भी स्वादिष्ट खाना खाने पहुंच जाते हैं. जब भी हम ढाबे पर जाते हैं तो मुख्य रूप से स्पेशल दाल तड़का, चटनी, लस्सी और तंदूरी रोटी जैसी चीजें ट्राई करते हैं.

वैसे तो ढाबे इन्हीं चीजों के लिए ज्यादा मशहूर होते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ढाबे के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी दाल या तड़केदार सब्जी के लिए फेमस नहीं है. बल्कि इसमें एक ऐसा जायका है जो काफी यूनिक है. यहां के लजीज पकवान इतने फेमस है कि इस पर ऐश्वर्या राय से सलमान खान और धर्मेंद्र जैसे सुपरस्टार भी आ चुके हैं. तो चलिए बताते हैं आपको इस ढाबे के जायके के बारे में विस्तार से–

मित्रों जब भी हम मावा और नान जैसे शब्द सुनते हैं तो इनका कंबीनेशन करने के लिए हमारा दिमाग जरूर चकरा जाएगा. लेकिन क्योंकि तंदूरी नान में मावा की स्टफिंग करना और उसकी सिकाई करना बेहद मुश्किल काम है. ऐसा इसलिए है क्योंकि तंदूर के अंदर से तीन या चार नान में से एक ही नान कामयाब होकर बाहर निकलती है. लेकिन यही संघर्ष भरा काम इस ढाबे की शान है.

दरअसल हम बात करने जा रहे हैं सीकर रोड स्थित शर्मा ढाबे के बारे में, जिन का सफर एक चाय की थड़ी से शुरू हुआ था. लेकिन आज इनका करोड़ों का कारोबार है. इस ढाबे का मैनेजमेंट देख रहे मुकेश शर्मा ने कहा कि उनके दादा ने मावा नान का कॉन्सेप्ट शुरू किया था.

  • ढाबे का एड्रेस यहाँ है- Address: Sharma Dhaba, 12, G-445(I, Sikar Rd, Vishwakarma Industrial Area, Jaipur, Rajasthan 302013
  • इसका ओपनिंग टाइम 11:00AM है और क्लोजिंग टाइम 10:30PM है। (Timing-11AM to 10:30PM)
  • आप इस ढाबे का खाना ऑनलाइन भी आर्डर कर सकते है। 

आमतौर पर ढाबों में मिठाइयां नहीं मिलती है लेकिन ग्राहकों को खाने के साथ मीठा परोसने के लिए मावा नान बनाने की शुरुआत की गई थी. लेकिन सबसे बड़ा चैलेंज मावा नाम को सही शेप में लाने का था जिसमें कई साल लग गए. क्योंकि तंदूर की गर्मी में मावा पिघल कर पूरी नान खराब कर देता था.

मुकेश शर्मा कहते हैं कि आज भी मावा नान सही बनाने का अनुपात काफी कम है. अगर हम तीन चार बार कोशिश करते हैं तो उसमें से एक ही नान पूरी तरह चिपक कर भठी से बाहर आ पाती है. मुकेश शर्मा कहते हैं कि हम किसी ग्राहक से आर्डर लेने से पहले ही उसे बनने में लगने वाले समय की जानकारी देते हैं ताकि उन्हें लंबा इंतजार ना लगे.

₹300 की एक नान, करोड़ो का कारोबार

ढाबे पर एक नान ₹300 में मिलती है. जिसका औसतन वजन लगभग आधा किलो होता है. इस नान को चार से पांच लोग आसानी से खा सकते हैं. मिली जानकारी के अनुसार शर्मा ढाबे पर प्रतिदिन 300 से 500 लोग खाना खाने आते हैं जिसमें से 10 अथवा 15% ऑर्डर केवल मावा नान के होते हैं.

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ढाबे पर साल भर में एक करोड़ से ज्यादा कारोबार केवल मावा नान का होता है. आपको बता दें कि शर्मा ढाबे पर मावा नान के अलावा भी कई चीजें मिलती है जिसमें अजवाइन नान, गार्लिक नान, लच्छा परांठा, पनीर नान, आलू मसाला नान शामिल है.

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जयपुर ख़ास: ना कोई चटनी–ना आलू छीले जाते, ऐसी लजीज स्वाद कचौरी खाने वालों की लगी रहती हैं भीड़ https://jaipur.gajabmedia.com/499/sampat-ki-aaloo-kachori-jaipur-story/ https://jaipur.gajabmedia.com/499/sampat-ki-aaloo-kachori-jaipur-story/#respond Thu, 21 Jul 2022 04:10:14 +0000 https://jaipur.gajabmedia.com/?p=499 यूं तो मूंग दाल और प्याज को कचोरी का स्वाद बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है. वहीं समोसे में आलू स्वाद में चार चांद …

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यूं तो मूंग दाल और प्याज को कचोरी का स्वाद बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है. वहीं समोसे में आलू स्वाद में चार चांद लगाता है. लेकिन जयपुर में आलू और कचोरी के बीच ऐसी दोस्ती हुई कि उसने अपने स्वाद का जादू चारों तरफ बिखेर दिया.

लोगों को यह जायका इतना जबरदस्त लगा कि इसे चखने वालों की भीड़ लगने लगी और लोग आलू की कचोरी में अपनी बारी लगाने के लिए लाइन से इंतजार करने लगे. यही कारण रहा कि 90 साल पहले एक छोटी सी दुकान से शुरुआत करने वाले आज आलू कचोरी के मामले में एक ब्रांड बन चुके हैं, जिनका नाम है संपत की आलू कचोरी.

आज यह जयपुर की भीड़ भरी गलियों में अपने स्वाद की खुशबू बिखेर रही है जिसे चखने वालों का तांता लगा रहता है. लेकिन एक वक्त था 1930 के आसपास का, जब कचोरी में मूंग दाल और समोसे में आलू ही राजे रजवाड़ों की पहली पसंद हुआ करती थी. लेकिन इसी दौरान तकरीबन साल 1933 में संपत राम माहेश्वरी ने आलू और कचोरी के साथ एक नया प्रयोग किया.

तैयार की अपनी खुद की रेसिपी:- संपत राम माहेश्वरी ने उबले हुए आलू का छिलका उतारे बगैर अपना एक सीक्रेट मसाला तैयार किया जिसको कचौरी में भरकर उन्होंने बेहद खस्ता और स्वादिष्ट कचौरी तैयार की. शुरुआत में लोग इसे मूंग दाल की कचौरी समझ कर खाने लगे लेकिन बाद में उन्हें इस कचौरी की खासियत पता लगी और इसी के साथ लोग संपत राम माहेश्वरी के स्वाद के मुरीद बन‌ गए.

संपर्क के पोते चलाते हैं आज साम्राज्य:- आज संपत राम महेश्वरी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके पोते अनिल माहेश्वरी अपने दादा के साम्राज्य को संभाल रहे हैं. अनिल महेश्वरी इस विषय में बताते हैं कि हमारी कचोरी की दो खासियत है. एक तो कि हम आलू का छिलका नहीं उतारते हैं.

दूसरा दादा संपत के बताए गए सीक्रेट मसाले. जिनके प्रयोग से कचौरी के साथ चटनी की आवश्यकता भी नहीं पड़ती. यह दादा संपत की कचौरियों के साथ एक्सपेरिमेंट का परिणाम ही है कि 90 साल से संपत्त की आलू कचोरी एक ब्रांड बनी हुई है.

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